प्रश्न: 2026 में भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण को प्रभावित करने वाली राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियाँ क्या हो सकती हैं? (200 शब्द, 15 अंक)


1. राजनीतिक चुनौतियाँ
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बांग्लादेश में राजनीतिक नेतृत्व में परिवर्तन:
शेख हसीना के पदत्याग के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी है, जिसकी चीन के प्रति झुकाव भारत के लिए विश्वास की समस्या पैदा करता है।
भारत लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के साथ ही संवाद करना पसंद करता है।
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चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश धुरी का उदय:
बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ता सहयोग (जैसे लालमोनीहाट बेस की बहाली) जल कूटनीति को जटिल बनाता है।
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व्यापार विशेषाधिकारों की समाप्ति:
भारत द्वारा ट्रांजिट सुविधाओं की रद्दीकरण नीति, संधि को और अधिक राजनीतिक रूप देने का जोखिम उत्पन्न करती है।
2. तकनीकी और कानूनी मुद्दे
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गैर-स्वचालित नवीनीकरण प्रावधान:
अनुच्छेद XII के अनुसार, संधि का नवीनीकरण पारस्परिक सहमति पर निर्भर है, जिससे द्विपक्षीय सौहार्द के बिना यह असंभावित हो सकता है।
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जलवायु और जल विज्ञान में विविधता:
मौसमी उतार-चढ़ाव जल आपूर्ति में अनिश्चितता लाते हैं, जिससे निर्धारित जल वितरण बाधित हो सकता है।
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बुनियादी ढांचे की चुनौतियाँ:
पूर्वी नदियों की अधिक जल मात्रा और प्रवाह में अस्थिरता निगरानी को जटिल बनाती है।
3. संस्थागत और प्रशासनिक पहलू
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संयुक्त नदी आयोग की प्रभावशीलता:
आयोग की निरंतर भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2025 कोलकाता बैठक जैसे संवाद बनाए रखना आवश्यक है।
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डेटा पारदर्शिता की समस्या:
प्रवाह डेटा में विसंगतियाँ और साझी निगरानी प्रणाली में विश्वास की कमी समझौते में बाधा बन सकती है।
निष्कर्ष:
संधि के नवीनीकरण के लिए राजनीतिक स्थिरता, विश्वास निर्माण, और तकनीकी सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं।
